बजट 2026: क्या यह 'अमीर' भारत की नींव है या मिडिल क्लास पर एक और बोझ ?
  • By Admin
  • 02 Feb, 2026

बजट 2026: क्या यह 'अमीर' भारत की नींव है या मिडिल क्लास पर एक और बोझ ?


1 फरवरी का दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी 'फैमिली डिनर' की तरह होता है, जहाँ माँ (वित्त मंत्री) के पास परिवार का हर सदस्य अपनी फरमाइशें लेकर बैठता है। छोटा भाई मनाली घूमने की ज़िद करता है, बड़ा भाई शादी के खर्चों की चिंता करता है, और पिता याद दिलाते हैं कि पहले घर की टपकती छत ठीक करनी है। लेकिन इस साल का डिनर थोड़ा अलग रहा। जैसे ही बजट के पन्ने खुले, शेयर बाज़ार 1,000 अंकों के साथ धड़ाम से गिर गया। यह गिरावट इस बात का संकेत थी कि निवेशकों और मिडिल क्लास की उम्मीदों और सरकार के दीर्घकालिक विज़न के बीच एक गहरी खाई है।

जहाँ सरकार का पूरा ज़ोर 'कैपिटल एक्सपेंडिचर' (पूँजीगत व्यय) और भविष्य के भारत की नींव रखने पर है, वहीं आम आदमी अपनी थाली में तत्काल राहत की तलाश कर रहा है। क्या यह बजट भविष्य के विकसित भारत का मास्टरप्लान है या महज़ आंकड़ों की बाजीगरी? आइए, एक विश्लेषक की नज़र से इसके 7 सबसे बड़े खुलासों को समझते हैं।


1. इनकम टैक्स और सेहत: क्या राहत मिली?
आम आदमी के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी, करदाताओं को अपनी जेब ढीली ही रखनी होगी। हालांकि, 'ईज़ ऑफ कम्पलायंस' के तहत एक प्रशासनिक राहत ज़रूर मिली है—रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की समय सीमा को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है।
स्वास्थ्य के मोर्चे पर सरकार का रवैया मानवीय और रणनीतिक दोनों है:
 कैंसर की 17 जीवन रक्षक दवाओं और 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाओं को पूरी तरह 'ड्यूटी-फ्री' कर दिया गया है, जिससे इलाज की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।

आयुष फार्मेसियों का आधुनिकीकरण और तीन नए 'ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद' की स्थापना की जाएगी।

 मेडिकल टूरिज्म: सरकार ने निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से 5 मेडिकल टूरिज्म हब्स विकसित करने का प्रस्ताव रखा है। इसका लक्ष्य भारत को विश्व के 'हेल्थकेयर डेस्टिनेशन' के रूप में स्थापित करना है।


2. भविष्य की शिक्षा: डिग्री नहीं, अब स्किल्स का बोलबाला
बजट 2026 पारंपरिक शिक्षा मॉडल को एक रणनीतिक चुनौती देता है। अब ध्यान केवल डिग्री पर नहीं, बल्कि 'लर्न एंड अर्न' (सीखो और कमाओ) मॉडल पर है। EFOS जैसे करियर संस्थानों के विश्लेषण के अनुसार, भविष्य की नौकरियां AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), डेटा साइंस और IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) के इर्द-गिर्द होंगी।
 सरकार ने 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में 'कंटेंट क्रिएटर लैब्स' बनाने की घोषणा की है।
 इसका उद्देश्य युवाओं को डिजिटल इकोनॉमी के लिए तैयार करना है।
विश्लेषण: हालांकि कंटेंट क्रिएशन लैब्स एक "आधुनिक और हेडलाइन बनाने वाली नीति" लगती है, लेकिन एक विश्लेषक के तौर पर सवाल उठाना ज़रूरी है: क्या हमें डिजिटल लैब्स से पहले स्कूलों की उन बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान नहीं देना चाहिए था, जहाँ छतें आज भी टपक रही हैं?


3. इंफ्रास्ट्रक्चर और रेलवे: टीयर-2 और टीयर-3 शहरों का उदय
सरकार ने शहरी विकास के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का भारी-भरकम आवंटन किया है, जो मुख्य रूप से 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए है। इसके अलावा, अगले 5 वर्षों में विशिष्ट शहरी बुनियादी ढांचे के लिए ₹5,000 करोड़ अलग से रखे गए हैं।
रेलवे के क्षेत्र में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई है, जो कनेक्टिविटी की परिभाषा बदल देंगे:
1. मुंबई से पुणे
2. पुणे से हैदराबाद
3. हैदराबाद से बेंगलुरु
4. हैदराबाद से चेन्नई
5. चेन्नई से बेंगलुरु
6. दिल्ली से वाराणसी
7. वाराणसी से सिलीगुड़ी


4. 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' और टेक्सटाइल: एक रणनीतिक शांति प्रस्ताव
इस बजट में सरकार ने 'उत्तर बनाम दक्षिण' के फंडिंग विवाद को चतुराई से एड्रेस किया है। 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' की घोषणा कर तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों को एक बड़ा औद्योगिक बूस्ट दिया गया है। यह कॉरिडोर स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) और रक्षा उपकरणों के निर्माण में लगने वाले खनिजों के लिए भारत की चीन पर निर्भरता को कम करेगा।
वहीं, बांग्लादेश से मिल रही वैश्विक प्रतिस्पर्धा का जवाब देने के लिए 'नेशनल फाइबर स्कीम' और 'मेगा टेक्सटाइल पार्क्स' का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर फिर से वैश्विक बाजार में मजबूती से खड़ा हो सके।


5. महिलाओं और युवाओं के लिए नई योजनाएं
सामाजिक कल्याण की योजनाओं में 'लखपति दीदी' के बाद अब 'C-Mart' योजना का आगाज़ हुआ है, जिसके तहत महिला उद्यमियों को व्यापार के लिए रियायती दरों पर ऋण मिलेगा। इसके अलावा:
 देश के 800 जिलों में लड़कियों के लिए सुरक्षित हॉस्टल्स बनाए जाएंगे।
 खेलो इंडिया मिशन के तहत कोचों की ट्रेनिंग और नई स्पोर्ट्स लीगों के माध्यम से ज़मीनी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारा जाएगा।
 पर्यटन क्षेत्र में सुधार के लिए IIM के सहयोग से 10,000 टूरिस्ट गाइड्स को पेशेवर रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा।


6. बजट की कड़वी हकीकत: कर्ज और खर्च का गणित
एक एक्सपर्ट के तौर पर, बजट की सबसे चिंताजनक तस्वीर 'राजकोषीय घाटे' (Fiscal Deficit) में छिपी है। यदि भारत की कुल आय ₹1 है, तो उसका गणित कुछ इस प्रकार है:
 कुल अनुमानित आय: ₹36.51 लाख करोड़
 कुल अनुमानित खर्च: ₹53.47 लाख करोड़
 ऋण भार (Borrowing): सरकार को अपने खर्चों को पूरा करने के लिए हर ₹1 में से 24 पैसे कर्ज लेने पड़ रहे हैं।
 ब्याज का बोझ: सबसे बड़ी विडंबना यह है कि कुल खर्च का एक विशाल हिस्सा यानी ₹14.03 लाख करोड़ (लगभग 26%) केवल पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने में चला जाएगा।
इससे भी बड़ी विडंबना (Irony) देखिए: जहाँ ISRO जैसे भविष्यवादी संस्थान को महज़ ₹13,000 करोड़ मिले हैं, वहीं सरकार डाक विभाग (Department of Posts) के घाटे को भरने के लिए उसका दोगुना यानी ₹27,000 करोड़ खर्च कर रही है।
"ऐसा लगता है कि जो लोग प्रोडक्टिव हैं और ईमानदारी से टैक्स भरते हैं, उन्हीं पर पूरे देश का भार है, जबकि सिस्टम की खामियों का फायदा उठाने वाले अपनी ज़िम्मेदारी से बच निकलते हैं।"


7. निष्कर्ष: एक लंबी रेस का घोड़ा या महज़ कागजी योजना?
बजट 2026 स्पष्ट रूप से 'शॉर्ट-टर्म राहत' के बजाय 'लॉन्ग-टर्म रिफॉर्म्स' का दस्तावेज़ है। मेडिकल टूरिज्म, मेंटल हेल्थ के लिए NIMHANS 2 की स्थापना, और पूर्वोत्तर के लिए 'बुद्धिस्ट सर्किट' जैसे प्रोजेक्ट्स बताते हैं कि सरकार की नज़र 2047 के विकसित भारत पर है।
लेकिन सवाल वही खड़ा है: क्या हम एक 'विकसित भारत' की नींव कर्ज के पहाड़ पर खड़ी कर रहे हैं? क्या मिडिल क्लास आज की अपनी छोटी ज़रूरतों का त्याग करने के लिए तैयार है, जबकि उसे बदले में फिलहाल महज़ भविष्य के वादे मिल रहे हैं?
आपकी राय क्या है? क्या आप इस बजट को देश के लिए एक 'कैपिटल एक्सपेंस' (एसेट बनाने वाला निवेश) मानते हैं या आपको लगता है कि यह केवल एक और 'रेवेन्यू एक्सपेंस' बनकर रह जाएगा? कमेंट्स में अपने विचार ज़रूर साझा करें।